घर पर बायोफर्टिलाइजर कैसे बनाएं: भाइयों, नमस्कार, मैं Vikas सीतापुर के एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। घर के पास ही 5-6 एकड़ जमीन है। धान, गेहूँ, मक्का और सब्जी उगाता हूँ। पहले जब भी खेती करता था तो रासायनिक खाद पर बहुत निर्भर करता था। यूरिया, डीएपी हर फसल में डालता था। खर्चा बढ़ता जा रहा था, मिट्टी सख्त हो रही थी और केंचुए गायब होते जा रहे थे। तब एक अनुभवी किसान भाई ने बताया – घर पर ही बायोफर्टिलाइजर बना लो। सबसे आसान और असरदार है जीवामृत।
आज मैं अपने अनुभव से बता रहा हूँ कि घर पर बायोफर्टिलाइजर कैसे बनाते हैं। कोई महँगा सामान नहीं चाहिए। सब गाँव में ही मिल जाता है।

जीवामृत क्या है?
किसान भाइयों , आपको बात दें की जीवामृत एक तरल जैविक खाद है। इसमें लाखों-करोड़ों सूक्ष्म जीव होते हैं जो मिट्टी को जीवंत बना देते हैं। यह सूक्ष्म जीव मिट्टी में जाकर पोषक तत्वों को घुलनशील बनाते हैं, जिससे पौधा आसानी से ले पाता है। रासायनिक खाद की तरह तुरंत असर नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी अच्छी हो जाती है, पानी ज्यादा देर तक रुकता है और फसल मजबूत होती है।
मेरे खेत में नियमित जीवामृत डालने के बाद दो-तीन फसलों में फर्क साफ दिखने लगा। मिट्टी नरम हो गई और केंचुए वापस आने लगे।
जीवामृत बनाने के लिए क्या चाहिए? (200 लीटर – लगभग 1 एकड़)
- देसी गाय का ताजा गोबर – 10 किलो
- देसी गाय का गोमूत्र – 8 से 10 लीटर (पुराना बेहतर)
- गुड़ – 1 से 2 किलो
- बेसन या किसी भी दाल का आटा – 1 से 2 किलो
- बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी – एक मुट्ठी
- साफ पानी – 180-200 लीटर (नलकूप या कुएँ का पानी)
- प्लास्टिक का 200 लीटर वाला ड्रम
देसी गाय का गोबर और गोमूत्र सबसे अच्छा होता है। संकर नस्ल का भी चल जाता है। घर में गाय न हो तो पड़ोसी से मांग लो।
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बनाने की आसान विधि क्या है?
- प्लास्टिक ड्रम में 180-200 लीटर पानी भर लो।
- 10 किलो ताजा गोबर डालकर लकड़ी के डंडे से अच्छे से मिलाओ।
- 8-10 लीटर गोमूत्र डाल दो।
- गुड़ और बेसन को थोड़े पानी में घोलकर डालो।
- एक मुट्ठी पेड़ के नीचे की मिट्टी डाल दो।
- लकड़ी के डंडे से घड़ी की सुई की दिशा में 4-5 मिनट हिलाओ।
- बोरी या कपड़े से ढक दो (पूरी तरह बंद मत करना)।
- छायादार जगह पर रख दो।
हर दिन सुबह और शाम एक बार हिलाते रहो। 3 से 5 दिन में जीवामृत तैयार हो जाता है। अच्छी मिट्टी जैसी खुशबू आने लगे तो समझो तैयार है।
बायोफर्टिलाइजर का इस्तेमाल कैसे करें?
- सिंचाई के साथ: 200 लीटर जीवामृत को पानी में मिलाकर एक एकड़ में डाल सकते हो।
- छिड़काव के लिए: 1 लीटर जीवामृत को 10 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते हो।
- फसल के 20-25 दिन, 40-45 दिन और 60 दिन पर डालने से अच्छा असर दिखता है।
मेरे खेत का अनुभव:
दोस्तों , पहले जब भी खेत मे रासायनिक खाद डालते थे तब लगभग 8 -12 हजार खर्च होता था अब जीवामृत नियमित डालने से यूरिया की मात्रा लगभग आधी हो गई है। कुछ फसलों में सिर्फ जीवामृत और थोड़ी वर्मी कम्पोस्ट से काम चल जाता है। मिट्टी नरम हो गई है, पानी पहले से ज्यादा देर तक रुकता है और फसल स्वस्थ दिखती है। बीमारी भी पहले से कम लगती है।
एक सीजन में सिर्फ गुड़ और बेसन का खर्चा आता है – 200 से 300 रुपये में 200 लीटर बन जाता है। बाकी सब मुफ्त।

कुछ और आसान बायोफर्टिलाइजर कौन से है?
बीजामृत (बीज उपचार के लिए)
5 किलो गोबर + 5 लीटर गोमूत्र + थोड़ा चूना + एक मुट्ठी मिट्टी + 20 लीटर पानी मिलाकर रात भर रखो। अगले दिन बीज को इसमें भिगोकर बोओ। बीज जनित बीमारी कम लगती है और अंकुरण अच्छा होता है।
घन जीवामृत
गोबर, गुड़, बेसन और मिट्टी को गूँधकर लड्डू जैसा बना लो। सूखने के बाद खेत में मिला सकते हो।
वर्मी कम्पोस्ट
छायादार जगह पर बेड बनाकर गोबर, सूखी पत्तियाँ और रसोई का कचरा डालो। केंचुए छोड़ दो। नमी बनाए रखो। 45-60 दिन में बढ़िया खाद तैयार हो जाती है।
सावधानियाँ:
- हमेशा प्लास्टिक का ड्रम इस्तेमाल करो।
- रोज सुबह-शाम हिलाना जरूरी है।
- तैयार जीवामृत 7-12 दिन के अंदर इस्तेमाल कर लो।
- क्लोरीन वाला पानी मत डालना।
- गोबर और गोमूत्र साफ होना चाहिए।
आखिरी बात:
भाई, यह सब मैंने खुद करके देखा है। घर बैठे बहुत कम खर्च में बायोफर्टिलाइजर बना सकते हो। एक बार नियमित इस्तेमाल शुरू कर दो तो रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने लगेगी। मिट्टी भी बच जाएगी।
अगर गाय नहीं है तो पड़ोसी से गोबर-गोमूत्र ले लो। एक बार बनाकर खेत में डालकर देख लो, फर्क खुद महसूस होगा।
जय जवान जय किसान
