ड्रोन से दवाई छिड़कने का खर्च और फायदा 2026: भाइयों नमस्कार, मैं Vikas एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। घर के पास ही करीब 5-6 एकड़ जमीन है। जिसमे हम धान, गेहूँ, मक्का और थोड़ी सब्जियाँ उगाता हूँ। अगर मैं अपनी बात करे तो मैं पिछले कई सालों से खेती कर रहा हूँ। पहले जब दवाई छिड़कनी होती थी तो सच में बहुत परेशानी होती थी। 2-3 मजदूर बुलाना पड़ता था, पंप लगाना, बाल्टी-बाल्टी पानी भरना, पूरे दिन धूप में खड़े रहना। बारिश आ जाए तो काम रुक जाता था। ऊपर से दवाई शरीर पर लगती थी। रात को आँखों में जलन, हाथ-पैर में जलन और कभी-कभी उल्टी भी हो जाती थी। खर्चा भी अलग से बढ़ जाता था।
अब 2025-26 में हमारे इलाके में ड्रोन आ गया है। पहली बार जब मैंने ड्रोन से दवाई छिड़कवाई तो यकीन नहीं हुआ। सोचा यह क्या जादू है। आज मैं अपने खुद के अनुभव से बता रहा हूँ कि ड्रोन से दवाई छिड़कने का असली खर्च कितना आता है और फायदा कितना होता है। कोई किताबी बात नहीं, सीधा खेत का हिसाब।

पहले पारंपरिक तरीके का पूरा खर्च देखते है?
हमारे गाँव में अभी भी बहुत से किसान पंप-स्प्रे या हाथ के स्प्रेयर से ही काम करते हैं। एक एकड़ का हिसाब लगाते हैं तो कुछ ऐसा निकलता है:
- 2 से 3 मजदूर लगते हैं
- हर मजदूर की दिहाड़ी 350 से 500 रुपये (पीक सीजन में 600-700 तक)
- पानी 150 से 200 लीटर
- दवाई थोड़ी ज्यादा लगती है क्योंकि छिड़काव बराबर नहीं होता
- समय लगता है ढाई से चार घंटे एक एकड़ में
इस हिसाब से सिर्फ मजदूरी और पानी मिलाकर 700 से 1200 रुपये प्रति एकड़ आसानी से निकल जाता है। अगर सीजन में 4 या 5 बार स्प्रे करना पड़े तो 10 एकड़ वाले किसान का सिर्फ छिड़काव का खर्च 35-40 हजार रुपये तक पहुँच जाता है। इसमें दवाई की बर्बादी और फसल दबने का नुकसान अलग।
अब ड्रोन से कितना खर्च आता है (2026 के रेट)
हमारे इलाके में निजी ड्रोन सेवा वाले आमतौर पर 400 से 600 रुपये प्रति एकड़ लेते हैं। सिर्फ छिड़काव का चार्ज। दवाई किसान खुद लाता है। कुछ जगहों पर सरकारी योजना के तहत 250 से 350 रुपये प्रति एकड़ तक भी मिल जाता है। कुछ जिलों में नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत और भी सस्ता हो जाता है।
ड्रोन में दवाई 20 से 30 प्रतिशत कम लगती है। क्योंकि स्प्रे बहुत महीन और बराबर होता है। पानी भी सिर्फ 8 से 12 लीटर प्रति एकड़ लगता है।
मेरे 5 एकड़ के खेत का उदाहरण ले लो:
- ड्रोन सेवा का खर्च: 2000 से 3000 रुपये
- समय: 40 से 50 मिनट में पूरा काम
- पानी: 40-50 लीटर पूरे 5 एकड़ के लिए
पारंपरिक तरीके से यही काम 8-10 हजार रुपये और दो दिन में होता था।
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असली फायदे जो मैंने खुद अनुभव किए
1. समय की बहुत बड़ी बचत:
पहले 5 एकड़ छिड़कने में डेढ़ दिन लग जाते थे। अब एक घंटे में हो जाता है। बाकी समय दूसरे काम में लगा सकते हो। सीजन में जब कई खेतों में एक साथ दवाई डालनी होती है, तब ड्रोन बहुत काम आता है।
2. पानी की बचत:
हमारे इलाके में पानी की हमेशा किल्लत रहती है। 200 लीटर की जगह 10 लीटर। यह छोटी बात नहीं है। गर्मी के दिनों में यह बचत और भी ज्यादा महसूस होती है।
3. दवाई की बचत:
पहले जो एक लीटर दवाई लगती थी, अब 700-800 मिली में काम चल जाता है। सीजन में सिर्फ दवाई की बचत ही 1500 से 2500 रुपये हो जाती है।
4. मजदूरों की टेंशन खत्म:
मजदूर मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। जो मिलते हैं उनकी दिहाड़ी भी बढ़ गई है। ड्रोन से यह झंझट ही खत्म हो जाती है। एक आदमी रिमोट से पूरा काम कर देता है।
5. सेहत सुरक्षित रहती है:
सबसे बड़ी बात यही है। पहले दवाई मुँह, आँख और शरीर पर लगती थी। कई बार साँस लेने में तकलीफ होती थी। अब ऑपरेटर दूर खड़ा रहकर रिमोट से ड्रोन उड़ाता है। हमारे शरीर पर एक बूँद भी नहीं पड़ती।
6. फसल को नुकसान नहीं होता:
ट्रैक्टर या मजदूर जब खेत में घूमते थे तो फसल कुछ-कुछ दब जाती थी। खासकर लंबी फसल में। ड्रोन ऊपर से उड़ता है, कोई नुकसान नहीं। मिट्टी भी नहीं दबती।
7. गीले खेत में भी काम हो जाता है:
बारिश के बाद जब खेत में पानी भरा हो, तब पारंपरिक तरीके से छिड़काव लगभग असंभव हो जाता है। ड्रोन आसानी से उड़ जाता है। गन्ने और धान के खेतों में यह बहुत फायदेमंद साबित हुआ है।
8. छिड़काव बराबर होता है:
हाथ से छिड़कने में कुछ जगह ज्यादा, कुछ जगह कम पड़ जाता था। ड्रोन में जीपीएस से पूरा खेत बराबर छिड़क जाता है। न तो कोई हिस्सा छूटता है और न ही ज्यादा दवाई गिरती है।
मेरी व्यक्तिगत गणना (10 एकड़ खेत के हिसाब से)
मान लो एक सीजन में 4 बार स्प्रे करना है।
पारंपरिक तरीका:
मजदूरी + पानी + बर्बादी ≈ 900 रुपये × 4 × 10 एकड़ = 36,000 रुपये
ड्रोन से:
सेवा चार्ज 500 रुपये × 4 × 10 = 20,000 रुपये
दवाई की बचत लगभग 6,000 से 8,000 रुपये
कुल सीधी बचत 12,000 से 15,000 रुपये
इसके अलावा समय, सेहत और फसल की सुरक्षा का फायदा अलग से है। अगर साल में दो फसलें लेते हो तो बचत और भी बढ़ जाती है।

कुछ सच्ची बातें जो जानना जरूरी है?
दोस्तों आपको बात दें की बहुत छोटे प्लॉट (1-2 एकड़) में कभी-कभी पारंपरिक तरीका सस्ता पड़ सकता है, खासकर अगर घर के लोग खुद छिड़क लें। लेकिन 4-5 एकड़ से ऊपर ड्रोन साफ बेहतर है। ड्रोन वाले को सही समय पर बुक करना पड़ता है। पीक सीजन में थोड़ा इंतजार लग सकता है। इसलिए पहले से बात कर लो।
दवाई हमेशा अच्छी क्वालिटी की ही दो। सस्ती और मिलावटी दवाई से नुकसान हो सकता है। ड्रोन वाले को बता दो कि कौन सी फसल है और कौन सी दवाई डालनी है।
सरकारी योजनाओं का फायदा क्या है?
सरकार नमो ड्रोन दीदी योजना और कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत ड्रोन खरीदने और सेवा देने पर सब्सिडी दे रही है। महिलाओं के समूहों को ड्रोन दिए जा रहे हैं। कई जगह एफपीओ और कृषि विभाग के माध्यम से सस्ती दर पर सेवा मिल रही है। अपने ब्लॉक के कृषि अधिकारी या ग्राम सेवक से जरूर पूछो।
आखिरी बात:
भाई, मैं अब लगभग सारी छिड़काव ड्रोन से ही करवाता हूँ। पहले लगता था यह शहर वालों का काम है, लेकिन अब गाँव में भी आसानी से हो जाता है। खर्च कम, मेहनत कम और फसल भी बेहतर दिखती है।
अगर आपके इलाके में अभी ड्रोन सेवा नहीं है तो कृषि विभाग या पास के किसान से संपर्क कर लो। एक बार करवाकर देखो, फर्क खुद महसूस होगा।
यह मेरे अपने अनुभव से लिखा है। जय किसान।
