गेहूं की सिंचाई : जानिए कब व कितनी संख्या में करे गेहूं की फसलों की सिंचाई

Wheat irrigation : फसल उत्पादन में सिंचाई एक महत्वपूर्ण घटक है। बिना सिंचाई के किसी भी फसल से अच्छी उपज प्राप्त करना संभव ही नहीं है। गेहूं की फसल भी इससे अछूता नहीं है जिस का उत्पादन हमारे देश में बड़े पैमाने पर की जाती है। गेहूं की फसल में उचित समय पर सिंचाई इसके पैदावार को काफी हद तक बढ़ा देते हैं। अतः किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई करते समय विशेष सावधानियो को बरतने की सलाह दी जाती है। गेहूं की फसल की उचित समय पर सिंचाई का क्या है वैज्ञानिक विधि इसी से संबंधित है हमारा आज का यह आर्टिकल तो चलिए विस्तार से जानते हैं गेहूं की फसल मे सिंचाई कैसे व कब-कब करे। क्या होना चाहिए गेहूं की फसल मे सिंचाई का उचित समय।

अच्छी पैदावार के लिए कितनी होनी चाहिए गेहूं की फसल मे सिंचाई की संख्या :

गेहूं की फसल में सिंचाई की संख्या तथा समय मृदा के प्रकार, जलवायु, फसल की किस्में तथा सिचाई के उपलब्ध संसाधन आदि पर निर्भर करता है। सिंचित दशा में गेहूं की फसल में कुल पाँच से छः सिंचाई करने की आवश्यकता होती है। जबकि असिंचित दशा में गेहूं की फसल के लिए एक से तीन सिंचाई की आवश्यकता होती है जो कि सिंचाई के उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करता है फिर भी गेहूं की फसल में अनिवार्य तौर पर कम से कम एक सिंचाई तो अवश्य ही करनी पड़ती है।

शीर्ष जड़ निकलने का समय होता है सिंचाई का क्रांतिकारी अवस्था :

गेहूं की फसल मे शीर्ष जड़ निकलने का समय (Crown root initiation) सिंचाई का सबसे महत्वपूर्ण व क्रांतिकारी अवस्था माना जाता है। जो गेहूं की बुआई के 20 से 25 दिन के बाद की अवस्था मानी जाती हैं। क्यों कि यह अवस्था गेहूं की फसल के लिए अति संवेदनशील होता है। अतः किसानों को गेहूं की फसलों में सिंचाई  (wheat irrigation) की इस अवस्था मे विशेष ध्यान देने की जरुरत है। तथा हर हाल में फसल के इस अवस्था मे सिंचाई अवश्य कर देनी चाहिए। एक रिपोर्ट में यह दावा किया जाता है कि शीर्ष जड़ निकलते समय सिंचाई में प्रतिदिन की देरी होने पर एक कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से उपज मे हानि होती है।
यदि किसानों के पास गेहूं की सिंचाई (wheat irrigation) करने के लिए सिर्फ एक सिंचाई का ही विकल्प हो तो उन किसानों को गेहूं की शीर्ष जड़ निकलते समय की अवस्था में ही सिंचाई करने की सलाह दी जाती है।

सीमित सिंचाई की दशा में फसल की पुष्पावस्था मे करे दुसरी सिंचाई :

यदि किसान के पास सिंचाई की उचित व्यवस्था उपलब्ध न हो फसल मे दुसरी सिंचाई फसल के पुष्पावस्था (Flower initiation stage) मे करने की सलाह दी जाती है। जो पौधों की फसल की बुआई के 80 से 85 दिन के बाद का समय माना जाता है।

फसल की दुधियावस्था मे सिंचाई करायेगा उत्पादन में भारी वृद्धि :

गेहूं की दुधियावस्था अवस्था (Milking stage) मे फसल जल मांग काफी बढ़ जाती है। गेहूं की फसल मे यह अवस्था फसल बुआई के लगभग 100 से 110 दिन के बाद आती हैं। अतः इस समय की सिंचाई का सिधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है। यदि किसान इस समय सिंचाई करने सेे चूक जाते है तो उनके फसल उत्पादन काफी प्रभावित हो जाता है।

सिंचित दशा मे ऐसे करें गेहूं की सिंचाई :

सिंचित दशा मे गेहूं की फसल के लिए मे कुल पाँच से छः सिंचाई करनी पड़ती है। अतः किसान सिंचित दशा निम्नलिखित समय पर गेहूं की सिंचाई (wheat irrigation)  करे

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गेहूं की पहली सिंचाई बुआई के 20.से 25 दिन के बाद शीर्ष जड़ निकलने के समय करे जबकि दूसरी सिंचाई बुआई के 40 से 45 दिनों से बाद कल्ले निकलते समय करना चाहिए। इसी तरह तीसरी व चौथी सिंचाई क्रमशः तने मे गाँठ बनते समय (बुआई के 60 से 65 दिनों के बाद) व पुष्पावस्था के समय (बुआई के 80 से 85 दिनों के बाद) सिंचाई करें। जबकि आखिरी दो सिंचाई क्रमशः दूधियावस्था (बुआई के 100 से 105 दिनों के बाद) व दाने पुष्ट होते समय (बुआई के 120 से 125 दिनों के बाद) करना चाहिए।

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