पोटेशियम क्या है पौधों में इसका महत्व, कार्य एवं कमी के लक्षण | potassium in hindi

Potassium in hindi : पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में नाइट्रोजन एवं फास्फोरस के बाद पोटेशियम तीसरा सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वो मे से एक है। यह पौधों में स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए फसलों के उत्पादन तथा उत्पाद को प्रभावित करता है। मृदा में इसकी कमी से फसलों की उपज व गुणवत्ता में गिरावट देखी जाती है। ऐसे में किसानों की पोटेशियम की जानकारी किसी फायदे से कम नहीं है। प्रश्न उठता है कि आखिर यह पोटेशियम क्या है ? पौधों में पोटेशियम का क्या महत्व है ?, तो चलिए विस्तार से जानते है कृषि के इस महत्वपूर्ण तत्व को इसके साथ ही साथ हम जानते है पौधों में पोटेशियम का कार्य एवं इसकी कमी के लक्षण

पोटेशियम क्या है ? | what is potassium in hindi ? :

पौधों के गुणवत्ता पोषक तत्व के रूप में जाने जानेवाला पोटैशियम (potassium in hindi) एक प्रकार का रासायनिक तत्व है। यह अत्यंत सक्रिय तत्व होने के कारण यौगिक के रुप मे पाया जाता है। पौधों के जीवन काल में इसकी ज्यादा मात्रा में आवश्यक होने के कारण इसे नाइट्रोजन एवं फास्फोरस के साथ मुख्य पोषण तत्व के रूप मे वर्गीकरण किया जाता है। इस तत्व की सर्वप्रथम पृथीकरण का श्रेय डंफ्री डेवी को जाता है। सन् 1807 ई. मे वे इस तत्व को पृथीकरण करके इसका नाम पोटैशियम रखा।

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पौधों में पोटेशियम का महत्व | importance of potassium in plants in hindi :

पौधों के संपूर्ण जीवन काल में पोटेशियम एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पौधों के शुष्क भार का लगभग 2% पोटेशियम (potassium in hindi) से ही बना होता है। यदि पौधों के भाग को देखा जाये तो पत्तियों में इसकी मात्रा सबसे अधिक, पौधों के दानों मे मध्य तथा बीजों में इसकी की मात्रा अपेक्षाकृत कम पायी जाती है।

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पौधों में पोटेशियम का कार्य | role of potassium in plants in hindi :

पौधों के सम्पूर्ण जीवन लिए तीसरा सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पोटैशियम का निम्नलिखित कार्य है

(A). पोटैशियम के उपयोग से पौधे के विकास में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं जिंक की उपयोग दक्षता में वृद्धि होती है।

(B). यह पौधों में रोग तथा हानिकारक प्रभाव से बचाने के लिए प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि दर्ज करता है।

(C). पोटेशियम (potassium in hindi) के प्रभाव से पौधे प्रबल एवं कठोर बनते हैं जिससे फसलों के गिरने का खतरा कम हो जाता है।

(D). पोटेशियम, नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की उपस्थिति में बीज के देरी या शीघ्रता से पकने के स्वभाव को संतुलन प्रदान करता है जिससे कि बीजों की क्वालिटी में वृद्धि होती है।

(E). यह फसलों में नाइट्रोजन तथा फास्फोरस के प्रभाव को संतुलित रखता है जिससे कार्बोहाइड्रेट के निर्माण में सहायता मिलती है

(F). इसकी उपस्थिति में पौध के कोशिकाओं के निर्माण तथा विभाजन में सहायता मिलती है।

(G). यह भूमि में नाइट्रोजन के हानिकारक प्रभाव को कम करने में मदद करता है।

(H). फसलों में पोटेशियम के उपयोग से पत्तियों में स्टार्च तथा शर्करा के निर्माण में वृद्धि होती है।

(I). पोटेशियम की उपस्थिति में फलों एवं दानों का आकार बढ़ जाता है इसके अलावा दानों में चमक बढ़ जाता है।

(J). यह आयन वाहक के रूप में अनेकों प्रकार की ऑक्सीकरण तथा अवकरण प्रक्रिया में सहायता प्रदान करता है।

(K). फसलों में पोटेशियम के उपयोग से एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है तथा कोशिका जल की उत्स्वेदन (Transpiration) कम हो जाती हैं।

(L). इसकी उपस्थिति में वाष्पोत्सर्जन द्वारा पानी की हानि को रोकने में मदद मिलती है।

(M). इसकी उपस्थिति में दलहनी फसलों में जड ग्रंथियों का अधिक विकास करने मे मदद मिलती है जिससे ये पौधे सहजीवी जीवाणुओं की उपस्थिति में नाइट्रोजन का अधिक स्थिरीकरण कर पाते है।

(N). दलहनी तथा अन्य फसलों में पाला सहन करने की क्षमता बढ़ाता है।

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पौधों में पोटेशियम के कमी के लक्षण | potassium deficiency symptoms in plants in hindi :

पौधों की पुरानी पत्तियों पर सर्वप्रथम दिखाई देने वाला पोटेशियम की कमी के लक्षण को हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते है

(A). पोटेशियम की अनुपस्थिति में पौधों की श्वसन क्रिया बढ जाने के कारण प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मे कमी आ जाती है जिससे कि पौधों में भोजन बनने की क्रिया मंद पड़ जाती है।

(B). पौधों में इनकी कमी की वजह से कल्लो एवं बालियों की संख्या में कमी आ जाती है तथा दानों का विकास रुक जाता है।

(C). इनकी अनुपस्थिति में सब्जियों एवं फलों की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिससे कि उनकी बाजार मूल्य कम हो जाती है।

(D). पोटेशियम की कमी से फसलों में फल-फूल लगना कम हो जाता है तथा पौधों में प्रजनन क्षमता समय से पूर्व ही समाप्त हो जाता है जिससे कि उपज में कमी देखी जाती है।

(E). पौधों में पोटेशियम की कमी की वजह से पत्तियों के सिरे तथा किनारे झुलसे हुए नजर आते हैं कभी-कभी पत्तियां मोटी पड़ जाती हैं तथा पत्तियों के सिरे मुड़ने लगते है। पत्तियों की मुख्य नसे हरी बनी रहती है। जो बाद में सुख कर जालीदार संरचना में बदल जाते हैं।

(F). पौधों में पोटेशियम की कमी की वजह से पौधे मुलायम हो जाते हैं जिससे इन फसलों में रोगों एवं कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है तथा यह रोग एवं कीट आसानी से इन पौधों को संक्रमित करते रहते हैं।

(G). इनकी कमी से तने पतले हो जाते हैं तथा पत्तियों के किनारे सिकुड़ जाते हैं।

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