राष्ट्रीय किसान दिवस | national farmers day in hindi 2021 | Kisan diwas

National farmers day 2021 in hindi : किसान दिवस कब तथा क्यों मनाया जाता है ? यदि आप के मन मे भी यही प्रश्न आ रहे है तो आप सही लेख पढ़ रहे है क्यों कि इस लेख में हम राष्ट्रीय किसान दिवस (kisan diwas) के बारे मे सभी महत्वपूर्ण जानकारियों पर चर्चा करने वाले हैं। तो चलिए किसान सहायता के इस खास लेख में हम विस्तार से जानते है किसान दिवस के बारे मेंfarmers day hindi

आखिर क्या है राष्ट्रीय किसान दिवस (Kisan diwas) | what is national farmers day in hindi :

किसान दिवस के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका राष्ट्रीय किसान दिवस (national farmers day in hindi) स्वतंत्र व मजबूत भारतीय किसानों का एक सम्मान है जो पूरा राष्ट्र इस दिवस को बड़े ही उत्साह एवं रुचि के साथ मनाता है। सरकार इस दिन इस कार्यक्रम का जश्न मनाने के लिए कृषि एवं किसानों के ऊपर कई वाद विवाद, समारोह एवं प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करता है।

किसान दिवस कब मनाया जाता है ? | When is Farmer Day celebrated in hindi ? :

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की याद मे किसानों तथा कृषि मे उनके योगदानो को देखते हुए उनके जन्मदिन यानी कि 23 दिसंबर को (साल 2001 से हर वर्ष) राष्ट्रीय किसान दिवस ( national farmers day in hindi) के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय किसान दिवस का महत्व | importance of national farmers day in hindi :

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपनी आजीविका के लिए कृषि से ही जुड़ा हुआ है। परंतु आश्चर्य की बात यह है कि कृषि इतनी बड़ी जनसंख्या के आय का मुख्य स्रोत होने के बावजूद इनसे जुड़ी हुई समस्याओं एवं मुद्दों से लोग आज भी अनजान है। ऐसे में राष्ट्रीय किसान दिवस किसानों को एक ऐसा मंच प्रदान करता है जिसके माध्यम से किसान अपनी समस्याओं तथा इससे जुड़ी हुई मुद्दों को एक बहुत बड़े मंच पर ला सकते हैं। क्योंकि राष्ट्रीय किसान दिवस किसानों को कृषि से जुड़े हुए तथा पदाधिकारियों तथा कृषि विशेषज्ञों से सीधे वाद-विवाद करने का मौका प्रदान करता है। इसके साथ ही साथ यह किसानों को कृषि की आधुनिक तथा वैज्ञानिक तकनीक सीखो एवं उनको सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करता है।

देश के पांचवें प्रधानमंत्री थे चौधरी चरन सिंह :

मिट्टी का पुत्र तथा किसान प्रधानमंत्री के नाम से मसहूर चौधरी चरन सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले मे 23 दिसंबर 1902 को एक किसान परिवार मे हुआ था। वे बहुत ही सरल एवं शांत स्वभाव वाले व्यक्ति थे। चौधरी चरण सिंह जी हमेशा कहा करते थे कि देश की खुशहाली तथा समृद्धि का रास्ता हमेशा खेतों तथा खरिहानो से होकर ही गुजरता है। वे आजीवन किसानों के लिए संघर्ष करते रहे एवं उनके लिए ही वे राजनीतिक में भी आये। किसानों के प्रति उनके इसी संघर्ष के दम पर ही वे देश के पांचवें प्रधानमंत्री भी बने। वे देश के गृह मंत्री, वित्त मंत्री तथा उप प्रधानमंत्री के साथ ही साथ दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर भी आसीन रहे।

कडी मेहनत से पारित करायें थे जमींदारी उन्मूलन अधिनियम :

चौधरी चरण सिंह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा दिया गया प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान जय किसान‘ का पालन करते हुए अपने कार्यकाल के दौरान वे भारतीय किसानों तथा कृषि से जुड़ी अनेकों सुधारों एवं नीतियों की शुरुआत किए थे। ऐसा माना जाता है कि चौधरी चरण सिंह के कड़ी मेहनत के कारण ही जमींदारी उन्मूलन अधिनियम को पारित किया गया था।

आजादी के पहले से ही किसान हितों मे रहे सक्रिय :

आजादी के पहले सन् 1937 में चौधरी चरण सिंह जी ने सिर्फ 34 वर्ष की उम्र में ही उत्तर प्रदेश के असेंबली में किसानों के हितों में एक बिल पेश किए थे इस बिल के जरिए वे किसानों को उनकी फसलों का एक उचित मूल्य तथा उनकी आमदनी को बढ़ाना चाहते थे परंतु तमाम कोशिशों के बावजूद भी वे पूर्णता सफल नहीं हो सके।

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