मूंग की खेती कैसे की जाती है? – पूरी जानकारी आसान भाषा में 

नमस्कार किसान भाइयों आज हम बात करने वाले हैं मूंग की खेती को लेकर की मूंग की खेती किस प्रकार की जाती है? और मूंग की खेती की पूरी जानकारी के लिए अंत तक जरूर बने रहिए। 

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भारत में दलहनी फसलों का काफी महत्व है, क्योंकि ये मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ प्रोटीन का अच्छा स्रोत भी होती हैं। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण फसल मूंग है, जिसे लोग खाने के लिए बड़े चाव से इस्तेमाल करते हैं। मूंग की दाल सेहत के लिए फायदेमंद होती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है। अगर आप खेती से जुड़े हैं और कम समय में अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं, तो मूंग की खेती आपके लिए एक बढ़िया विकल्प हो सकता है।

मूंग की खेती कैसे की जाती है?

अगर आप भी मूंग की खेती करने की सोच रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि कैसे इसकी खेती करें, कौन-सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है, कब बुवाई करनी चाहिए, कौन-सी खाद डालनी चाहिए और सिंचाई कितनी करनी होगी, तो यह आर्टिकल आपके लिए पूरी गाइड की तरह काम करेगा। आइए, मूंग की खेती की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

मूंग की खेती के लिए सही जलवायु और मिट्टी कैसी होनी चाहिए? 

मूंग की फसल गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह से बढ़ती है। इसे 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो फसल कमजोर हो सकती है और अंकुरण प्रभावित हो सकता है। वहीं, बहुत ज्यादा ठंड में फली बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

मिट्टी की बात करें तो मूंग के लिए सबसे अच्छी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी होती है, जिसका जल निकास अच्छा हो। अगर मिट्टी में पानी ज्यादा समय तक ठहरता है, तो इससे जड़ें सड़ सकती हैं और फसल खराब हो सकती है। इसके लिए मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

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मूंग की बुवाई का सही समय और तरीका क्या है? 

मूंग की खेती तीन अलग-अलग सीजन में की जा सकती है आइए जानते हैं। 

1. ग्रीष्मकालीन मूंग – फरवरी से मार्च

2. खरीफ मूंग – जून से जुलाई

3. रबी मूंग – अक्टूबर से नवंबर

खरीफ सीजन में इसकी खेती सबसे ज्यादा की जाती है, क्योंकि इस समय बारिश की वजह से मिट्टी में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे फसल तेजी से बढ़ती है।

बुवाई के लिए सबसे पहले खेत को अच्छी तरह से जोतकर तैयार किया जाता है। यह सुनिश्चित करें कि मिट्टी नरम हो और उसमें नमी हो, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें। मूंग को कतारों में बोने से फसल की देखभाल आसान होती है और पैदावार भी अच्छी होती है। इसके लिए कतारों के बीच 30-35 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखें।

मूंग की खेती कैसे की जाती है?
मूंग की खेती कैसे की जाती है?

सही बीज का चुनाव और खाद प्रबंधन कैसा होना चाहिए? 

अच्छी फसल के लिए जरूरी है कि आप सही किस्म के बीज का चयन करें। भारत में मूंग की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं –

पूसा विशाल – जल्दी पकने वाली किस्म

टीएयू-1 – सूखा सहन करने वाली किस्म

श्वेता मूंग – अधिक उत्पादन देने वाली किस्म

कोयंबटूर-2 – अधिक प्रोटीन वाली मूंग

बुवाई से पहले बीज को राइजोबियम कल्चर और फफूंदनाशक दवा (थायरम या कार्बेन्डाजिम) से उपचारित करें, ताकि अंकुरण अच्छा हो और बीमारियों से बचाव हो सके।

मूंग की फसल ज्यादा उर्वरक नहीं मांगती, लेकिन अगर मिट्टी कमजोर हो तो उसमें संतुलित मात्रा में खाद डालना जरूरी होता है। जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट सबसे अच्छी होती है। इसके अलावा, यूरिया, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश की सही मात्रा से उपज बेहतर हो सकती है।

आप मूंग की खेती में सिंचाई और फसल की देखभाल कैसे करें? 

मूंग की खेती में सिंचाई का सही प्रबंधन करना बहुत जरूरी होता है। अगर खरीफ में खेती कर रहे हैं और बारिश हो रही है, तो सिंचाई की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर गर्मी के मौसम में मूंग उगा रहे हैं, तो 3-4 बार हल्की सिंचाई करनी चाहिए। ध्यान रखें कि फूल बनने और फलियों के समय नमी की कमी न हो, क्योंकि इसी समय पौधे को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। फसल को खरपतवार से बचाने के लिए 20-25 दिन के बाद एक बार निराई-गुड़ाई जरूर करें, ताकि पौधों को पूरा पोषण मिल सके और फसल तेजी से बढ़े।

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अच्छी फसल के लिए रोग और कीट नियंत्रण भी जरूरी है? 

मूंग की फसल में कई तरह के कीट और बीमारियाँ लग सकती हैं, जिनसे बचाव करना जरूरी है। सबसे आम समस्या पीला मोज़ेक वायरस होती है, जो फसल को पूरी तरह खराब कर सकता है। अगर पत्तियाँ पीली पड़ने लगें, तो तुरंत इमिडाक्लोप्रिड 17.8% का छिड़काव करें।

इसके अलावा, चूर्णी फफूंद भी मूंग की फसल को नुकसान पहुँचाती है। इससे बचाव के लिए सल्फर पाउडर या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें। कीटों जैसे थ्रिप्स और चूसक कीट से बचने के लिए जैविक उपायों का उपयोग करें या जरूरत पड़ने पर कीटनाशकों का छिड़काव करें।

कटाई और उत्पादन का समय ? 

मूंग की फसल 60-70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। जब इसकी फलियाँ पूरी तरह सूखकर भूरे रंग की हो जाएँ, तो यह कटाई के लिए तैयार होती है। कटाई के बाद मूंग को धूप में अच्छी तरह सुखाएँ और फिर अनाज निकालकर भंडारण करें। ध्यान रखें कि दानों में नमी न रहे, क्योंकि इससे फसल जल्दी खराब हो सकती है।

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निष्कर्ष : मूंग की खेती कैसे की जाती है?

अगर आप कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो मूंग की खेती एक शानदार विकल्प है। यह फसल जल्दी तैयार होती है, मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग बनी रहती है। अगर सही समय पर बुवाई की जाए, संतुलित खाद और उर्वरकों का उपयोग किया जाए, समय-समय पर सिंचाई और देखभाल की जाए, तो मूंग की खेती से अच्छी कमाई की जा सकती है।

इसी प्रकार कृषि संबंधी जानकारी के लिए बने रहिए KisanSahayata.com के साथ।

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