धान की खेती | paddy farming in hindi | dhan ki kheti 2021

paddy farming in hindi : धान भारत सहित विश्व की एक महत्वपूर्ण फसल है। हमारे देश में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाते है। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में खाद्यान्न समस्याओं को सुलझाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में किसानों को धान की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती किसी मुनाफे से कम नहीं होती। यदि आप भी धान की खेती (dhan ki kheti) करके अधिक मुनाफा कमाना चाहते है तो पढ़िये किसान सहायता का यह खास लेख क्यों कि किसान सहायता के इस लेख में हम paddy farming process step-by-step की सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। तो चलिए सबसे पहले बात कर लेते है धान की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों सेpaddy farming in hindi

धान की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थिति | climate of paddy farming in india in hindi :

यह उष्ण जलवायु का पौधा है। भारत में धान की खेती (Dhan ki kheti) 8° से 35° उत्तरी अक्षांशो में तथा समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर की जाती है। इसकी खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। यह उन क्षेत्रों में अच्छी तरह से उगता है जहां पर आद्रता अधिक, दिन लंबे तथा पानी की उपलब्धता अधिक होती है। धान की खेती (paddy farming in hindi) के लिए औसत तापमान 21 डिग्री सेंटीग्रेड से लेकर 37 डिग्री सेंटीग्रेड उपयुक्त रहता है। धान की खेती के लिए 50 सेंटीमीटर से लेकर 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आसानी से की जाती है। असिंचित क्षेत्रों में इसकी खेती उचित सिंचाई के माध्यम से की जाती है।

धान की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी | soil of paddy farming in hindi :

एक पुरानी कहावत है धान, पान और केला ये तीनो है पानी के चेला। अर्थात धान, पान एवं केला की खेती करने मे सर्वाधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। अतः धान की खेती (Dhan ki kheti) के लिए ऐसी मृदा का चयन करना चाहिए जिसमें जल धारण करने की क्षमता अधिक हो। चिकनी दोमट या मटियार मृदा जिसका पी.एच. मान 5.5 से 7.0 के मध्य हो धान की खेती (paddy farming in hindi) के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

भारत में धान की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती का उपयुक्त समय | best time of paddy farming in hindi :

धान किसी भी जलवायु में ढलने वाला पौधा होने के कारण हमारे देश के विभिन्न हिस्सों तथा मौसम में इसकी खेती की जाती है। भारत के उच्च वर्षा एवं तापमान वाले क्षेत्र में इसकी खेती वर्ष में एक बार खरीफ के मौसम में की जाती है जो भारत में आमतौर पर जून-जुलाई माह से लेकर अक्टूबर-नवंबर माह के बीच में पडती है। भारत में उगाई जाने वाली कुल धान उत्पादों में लगभग 84% धान का उत्पादन इसी मौसम मे ही की जाती हैं।

खरीफ के अतिरिक्त रबी एवं जायद के मौसम में भी धान की खेती (Dhan ki kheti) भारत के कुछ राज्यों में की जाती है। भारत में रबी के मौसम में बोई जाने वाली धान की फसल की बुवाई अक्टूबर-नवंबर में करते हुए मुनाफे की फसलों की कटाई फरवरी-मार्च में की जाती है। इसके अतिरिक्त जायद धान फसलों की बुवाई मार्च-अप्रैल में करते हुए जून में इसकी कटाई कर ली जाती हैं।

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धान की उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती के लिए भूमि की तैयारी | preparation of field for paddy farming in hindi :

धान की खेती (paddy farming in hindi) के लिए चयनित खेत को सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से एक जुताई करना चाहिए। उसके बाद खेत को तीन से चार जुताई देशी हल या हैरो से करते हुए खेत को समतल कर लेना चाहिए। अब अपने सुविधा अनुसार धान की शुष्क अथवा गीली विधियों से इसकी खेती करनी चाहिए।

भारत में धान की खेती की विधियां | method of paddy farming in India in hindi :

पानी की उपलब्धता तथा मौसम के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में धान की खेती (Dhan ki kheti) अलग-अलग तरीकों से की जाती है। भारत के जिन क्षेत्रों में पानी की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता होती है साथ ही साथ मानसून का भी साथ मिलता है वहां पर इसकी खेती गीली विधि से की जाती है। इसके विपरीत भारत के जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम होती है तथा सिंचाई के साधन भी कम होते हैं वहां पर धान की खेती (paddy farming in hindi) शुष्क विधियों द्वारा की जाती है।

(A). धान की गीली बुवाई बुआई विधि : इस पद्धति द्धारा धान की खेती के लिए खेत की तैयारी परंपरागत तरीके से की जाती है। इसके लिए सर्वप्रथम खेत में पानी भर कर खेत को जुताई करके खेत को समतल करते हुए लेव लगा लेना लेना चाहिए। अब पौधशाला मे तैयार धान का पौध को सावधानी पुर्वक उखाडते हुई एक निश्चित दूरी पर पौध की रोपाई कर ली जाती है।

(B). धान की सीधी बुवाई विधी : यह असिंचित क्षेत्रों में धान की खेती का आधुनिक पद्धति है। इस पद्धति में धान की बुआई गेहूं की ही भांति सीधे देशी हल या सीड ड्रिल की मदद से खेतों में करते हुए समय-समय पर आवश्यक सिंचाई की जाती है।

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धान की खेती हेतु पौध की तैयारी | Preparation of seedlings for paddy farming in hindi :

धान की गीली विधि द्वारा रोपाई हेतु धान के रोपण पूर्व ही धान का पौध नर्सरी में तैयार कर लिया जाता हैं। पौध नर्सरी हेतु, एक एकड नर्सरी से लगभग 15-20 एकड खेत की रोपाई हेतु की जा सकती है जो बीज प्रजातियों के अनुसार घट या बढ सकती है।

पौध नर्सरी तैयार करने हेतु सर्वप्रथम खेत को जुताई करके तथा खेत को समतल करके इसको पानी से भर लेना चाहिए। अब खेत में पहले से अंकुरित धान के बीज को डालकर नर्सरी तैयार कर लेनी चाहिए। जब धान का पौध 20 से 25 दिन का हो जाए तो इस पौध को उखाड़ कर रोपाई करने लेनी चाहिए।

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धान की खेती में खाद एवं उर्वरक की मात्रा | manure and fertilizers used for paddy farming in hindi :

धान की खेती (paddy farming in hindi) से अच्छी उपज प्राप्त करने मे खाद तथा उर्वरकों का विशेष महत्व होता है। इसकी खेती के लिए सामान्य तौर पर 120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फास्फोरस तथा 60 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से आवश्यकता होती है। इसके साथ ही साथ धान की फसल को खैरा रोग से बचाव हेतु जिंक का भी उपयोग किया जाता है। इन रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा खेत की जुताई के समय ही मृदा में मिला देना चाहिए तथा शेष नाइट्रोजन की मात्रा एवं जिंक को फसल के वृद्धि के समय उचित समय पर देना चाहिए।

धान की खेती मे सिंचाई का प्रबंध | irrigation management paddy farming in hindi :

जैसा कि ऊपर बताया जा चूका है कि धान की खेती (paddy farming in hindi) में जल का विशेष महत्व है। इसकी खेती के कुछ विशेष अवस्थाओं मे खेत में पानी भरा रहना चाहिए। फूल आने की अवस्था भी पानी के प्रति काफी संवेदनशील होता है। अतः धान के इन अवस्थाओ में खेत में 2.5 सेमी पानी से भरा रहना चाहिए नही तो उपज प्रभावित होती हैं।

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