फसलों में डीएपी (DAP) एनपीके (NPK) यूरिया (Urea) एवं पोटाश (potassium) का उपयोग की विधि

पौधों की उचित वृद्धि एवं विकास के लिए नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटाश जैसे पोषक तत्वों की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की पूर्ति हेतु हमारे देश में यूरिया (Urea), डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) एवं पोटाश (Potassium) जैसे रासायनिक उर्वरकों का सर्वाधिक उपयोग होता है। अब प्रश्न उठता है कि विभिन्न फसलों में इन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कब व कितनी मात्रा में करे। किसान सहायता के इस खास लेख मे हम आज इन्हीं यूरिया (Urea), डीएपी (DAP), एनपीके (NPK) और पोटाश (Potassium) जैसे रासायनिक उर्वरकों प्रयोग की विधियों पर चर्चा करेंगे। तो चलिये विस्तार से जानते है पौधों मे इन रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग की विधियों को

फसलों में यूरिया, डीएपी, एनपीके एवं पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के सिद्धांत :

यूरिया, डीएपी, एनपीके एवं पोटाश जैसे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग की विधि, उर्वरक ग्रहण दक्षता को प्रभावित करती है। सही विधि से इन रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग न होने के कारण पौधों द्वारा इन रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता फलस्वरूप फसल उत्पादन प्रभावित होती है। अतः किसानों को इन रासायनिक उर्वरकों का सही ढंग से उपयोग करना जरुरी हो जाता है।

फसलों में यूरिया के उपयोग की विधि :

यूरिया एक महत्वपूर्ण रासायनिक उर्वरक है इसमें 46% नाइट्रोजन तत्व पाया जाता है। हमारे देश के फसलों में नाइट्रोजन की पूर्ति हेतु इसका उपयोग सर्वाधिक होता है। नाइट्रोजन जल में आसानी से घुलनशील होता है इसके साथ ही साथ यह मृदा में चारों तरफ गतिमान होने के कारण फसलों में यूरिया के उपयोग करने पर यह आसानी से पौधों को उपलब्ध हो जाता है। मृदा में यूरिया का निछालन विधि द्वारा सर्वाधिक हानि होने के कारण इसका प्रयोग फसलों में एक बार में न करके फसलों के विभिन्न अवस्थाओं में करना चाहिए। फसलों में यूरिया का प्रयोग में खड़ी फसल में छिड़काव विधि द्वारा बुवाई के तुरंत पहले अथवा पौधों के क्रांतिकारी अवस्था को ध्यान में रखकर प्रयोग करके फसलों द्वारा इस रासायनिक उर्वरकों का सर्वाधिक का उपयोग कराया जा सकता है।

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फसलों में डीएपी एवं एनपीके उर्वरक का प्रयोग की विधि :

डीएपी एवं एनपीके का उपयोग फसलों को फास्फोरस तत्वों की पूर्ति हेतु किया जाता है क्यों कि यह उर्वरक फसलों को फास्फोरस तत्व की प्राप्ति के उत्कृष्ट स्त्रोत होते है। फास्फोरस पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों मे नाइट्रोजन के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है। यदि डीएपी व एनपीके उर्वरको का फसलों में उपयोग की बात की जाये तो फास्फोरस मृदा में बहुत धीरे-धीरे गतिशील होता है अतः इसका प्रयोग फसलो के जड़ों के पास ही करना चाहिए। डीएपी तथा एनपीके में पाया जाने वाला फास्फोरस का यौगिकीकरण बहुत ही शीघ्रता से हो जाने के कारण इसका प्रयोग पौधों की आवश्यकता के अनुरूप पौधों की जड़ों के पास करना लाभदायक होता है। अतः आप फसलों की बुआई के पूर्व ही इन रासायनिक उर्वरकों को मृदा मे मिला देने के बाद बुआई करें तो अच्छा परिणाम प्राप्त होता है।

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फसलों में पोटाश उर्वरक का प्रयोग की विधि :

म्यूरेट आफ पोटाश के रुप मे जाने जानेवाला पोटाश पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के रूप में तृतीय स्थान रखता है। पोटाश मृदा में बहुत कम गतिशील होता है इसीलिए इस रासायनिक उर्वरक का प्रयोग पौधों की जड़ों के पास करना लाभदायक होता है। इस उर्वरक को फसलों की बुआई के पूर्व ही मृदा मे मिला कर बुआई की जाती है जिससे इन उर्वरक का सर्वाधिक लाभ प्राप्त होता है।

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