Monsoon 2026 Kab Aayega?: नमस्कार किसान भाइयो, यह सवाल आज हर खेत में हो रहा है — “इस बार बारिश कैसी रहेगी? हमारी फसल का क्या होगा?”
तो सीधी बात — मौसम विभाग (IMD) ने अपना पहला अंदाज़ा दे दिया है, और खबर थोड़ी चिंताजनक है। लेकिन घबराओ मत। पूरी बात समझाता हूँ — कब आएगा मानसून, कितनी बारिश होगी, और आप अभी से क्या करो ताकि फसल का नुकसान न हो।

मानसून 2026 कब आएगा? — तारीखें क्या है?
किसान भाइयों सबसेपहले यह जानो कि मानसून भारत में कहाँ से शुरू होता है और कब तक पहुँचता है:
| जगह | मानसून कब पहुँचेगा |
|---|---|
| केरल (सबसे पहले) | 25 मई – 1 जून 2026 |
| महाराष्ट्र / गोवा | जून के पहले हफ्ते |
| मध्य प्रदेश | 10–15 जून के आस-पास |
| उत्तर प्रदेश | 15 जून – 20 जून 2026 |
| दिल्ली-NCR | 27 जून – 30 जून 2026 |
| पंजाब / हरियाणा | जुलाई पहले हफ्ते |
मतलब भाई — UP के किसानों के लिए मानसून 15-20 जून तक पहुँचने की उम्मीद है। यह सामान्य समय ही है।
कितनी बारिश होगी 2026 में? — सच्ची बात
यहाँ जो बात है वह थोड़ी सीधी और थोड़ी कड़वी है — इसलिए ध्यान से पढ़ो।
मौसम विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को आधिकारिक पूर्वानुमान जारी की है:
इस साल मानसून की बारिश Long Period Average (LPA) की सिर्फ 92% रहने का अनुमान है।
सीधे शब्दों में — सामान्य से 8% कम बारिश होगी इस साल। और Skymet Weather ने तो यह भी कहा है कि जुलाई-अगस्त में — जो खरीफ फसल के लिए सबसे जरूरी महीने हैं — बारिश और भी कम हो सकती है।
क्यों होगा ऐसा?
भाई, इसका कारण है अल-नीनो (El Niño)। यह एक समुद्र में होने वाली हलचल है जो भारत की बारिश को कम कर देती है। 2026 के मानसून के बीच में अल-नीनो आने की पूरी संभावना है — और IMD ने खुद यह माना है।
UP के किसानों को कितनी चिंता करनी चाहिए?
भाई, सीधा जवाब देता हूँ:
UP के कुछ इलाकों में बारिश सामान्य रहेगी, कुछ में कम होगी।
IMD के नक्शे के हिसाब से — पूर्वी UP (वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद की तरफ) में बारिश थोड़ी बेहतर रहेगी। पश्चिमी UP (आगरा, मथुरा, बरेली की तरफ) में कमी ज्यादा हो सकती है।
लेकिन यह अभी पहला पूर्वानुमान है — मई के अंत में दूसरा अपडेटेड अनुमान आएगा जिसमें ज्यादा साफ पता चलेगा।
खरीफ फसल पर क्या असर पड़ेगा?
यही है असली सवाल। चलते हैं एक-एक फसल पर:
धान (चावल):
धान को सबसे ज्यादा पानी चाहिए। कम बारिश में धान की पैदावार घट सकती है — खासकर उन इलाकों में जो सिर्फ बारिश पर निर्भर हैं। अगर आपके पास पंप सेट या नहर का पानी है तो ज्यादा चिंता नहीं। बिना सिंचाई के सिर्फ बारिश पर निर्भर हो तो कम धान लगाओ।
सोयाबीन:
सोयाबीन के लिए कम बारिश थोड़ी अच्छी भी हो सकती है — ज्यादा बारिश में सोयाबीन सड़ने लगता है। तो 2026 में सोयाबीन एक अच्छा विकल्प बन सकता है।
मक्का (Maize):
मक्का भी कम बारिश में अच्छा करता है। UP और बिहार के किसानों के लिए मक्का एक सुरक्षित विकल्प है इस साल।
दाल की फसलें (अरहर, मूंग, उड़द):
दाल की फसलें ज्यादा पानी नहीं माँगतीं। लेकिन अगर बारिश बहुत ही कम हो गई तो अरहर की फसल पर असर पड़ सकता है — क्योंकि अरहर का मौसम लंबा होता है और अगस्त-सितंबर की बारिश पर निर्भर करता है।
मूँगफली:
मूँगफली भी इस साल जोखिम क्षेत्र में है — कम बारिश में उपज घट सकती है।
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किसान भाइयो — अभी से यह 5 काम करो?
भाई, टेंशन लेने की जरूरत नहीं — तैयारी करने की जरूरत है। यह करो अभी से:
1. फसल बीमा करवाओ — अभी
PM फसल बीमा योजना में अभी रजिस्ट्रेशन करो। खरीफ सीजन के लिए डेडलाइन जून-जुलाई में होगी। अगर बारिश कम पड़ी और फसल खराब हुई — तो बीमा ही काम आएगा।
याद रखो: बीमा नहीं करवाया तो नुकसान हुआ तो एक पैसा नहीं मिलेगा।
2. धान की जगह मक्का या सोयाबीन सोचो
अगर आपके पास सिंचाई का पूरा इंतजाम नहीं है — तो इस साल धान कम लगाओ। मक्का, सोयाबीन, या मूंग ज्यादा सुरक्षित रहेंगे।
3. ड्रिप सिंचाई या पंप सेट का इंतजाम करो
अगर सरकारी नहर या ट्यूब वेल है तो ठीक है। वरना ड्रिप इरीगेशन सब्सिडी के लिए अप्लाई करो — UP में 50-90% सब्सिडी मिलती है। यह एक बार का खर्चा है जो आगे कई साल काम आता है।
4. खरीफ बीज जल्दी खरीदो
हर साल मानसून से पहले बीज की कीमत बढ़ती है और कमी होती है। मई के पहले हफ्ते में ही बीज ले लो — खासकर धान, मक्का, सोयाबीन के। बाद में रोने से कुछ नहीं मिलता।
5. IMD का साप्ताहिक पूर्वानुमान देखते रहो
IMD की वेबसाइट mausam.imd.gov.in या Meghdoot App Google Play से डाउनलोड करो। इसमें आपके जिले का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान मिलता है — बिल्कुल मुफ्त में। इसी से तय करो कि कब बुवाई शुरू करनी है।
एक जरूरी बात — कम बारिश का मतलब बर्बादी नहीं
भाई, डरो मत। यह भी सुन लो —
IMD का यह पूर्वानुमान पहला अंदाजा है। मई के अंत में दूसरा अपडेटेड पूर्वानुमान आएगा जिसमें और साफ तस्वीर मिलेगी।
इतिहास गवाह है — 2014-15 और 2019 में भी बारिश सामान्य से कम थी, लेकिन जो किसान तैयार थे, उन्होंने अच्छी फसल की। जो घबरा गए उनका नुकसान हुआ।
तैयार रहो, घबराओ मत।

मानसून 2026 — एक नज़र में सारांश
| बात | जानकारी |
|---|---|
| केरल में कब | 25 मई – 1 जून 2026 |
| UP में कब | 15–20 जून 2026 |
| कितनी बारिश | सामान्य से 8% कम (IMD) |
| खास खतरा | अल-नीनो — जुलाई-अगस्त में |
| सुरक्षित फसलें | मक्का, सोयाबीन, मूंग |
| जोखिम वाली फसलें | धान (जहाँ सिंचाई नहीं) |
| सबसे जरूरी काम | फसल बीमा करवाओ |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: मानसून 2026 में UP में कब आएगा? उत्तर: IMD के अनुमान के मुताबिक UP में मानसून 15 से 20 जून 2026 के बीच आने की संभावना है।
प्रश्न: क्या 2026 में सूखा पड़ेगा? उत्तर: अभी इतना नहीं कहा जा सकता। बारिश सामान्य से थोड़ी कम होगी — सूखा तभी पड़ेगा अगर जुलाई-अगस्त में भी बहुत कम बारिश हो। मई में अपडेटेड पूर्वानुमान आएगा।
प्रश्न: खरीफ में कौन सी फसल लगाएँ 2026 में? उत्तर: अगर सिंचाई का इंतजाम नहीं है तो मक्का, सोयाबीन, मूंग सुरक्षित हैं। धान के लिए पंप सेट या नहर का पानी होना चाहिए।
प्रश्न: फसल बीमा के लिए कहाँ जाएँ? उत्तर: अपने नजदीकी CSC सेंटर, बैंक, या pmfby.gov.in वेबसाइट पर जाओ। खरीफ सीजन की डेडलाइन जुलाई 2026 तक होगी।
प्रश्न: IMD का पूर्वानुमान कितना सही होता है? उत्तर: IMD का long-range पूर्वानुमान एक अंदाज़ा होता है — 100% सही नहीं होता। मई में दूसरा अपडेटेड पूर्वानुमान आएगा। तब और साफ पता चलेगा।
प्रश्न: अल-नीनो क्या होता है? उत्तर: अल-नीनो Pacific समुद्र में पानी गर्म होने की स्थिति है। जब यह होता है तो भारत में मानसून कमजोर हो जाता है। इस साल यह जुलाई-अगस्त में आने की उम्मीद है।
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