नमस्कार किसान भाइयों आज हम इस आर्टिकल पर जानकारी देंगे। आज के समय में खेती सिर्फ मेहनत का खेल नहीं रही, बल्कि इसमें टेक्नोलॉजी का भी बड़ा हाथ है। पहले खेती के लिए केवल हल, बैल और साधारण ट्रैक्टर का इस्तेमाल होता था,GPS-based ट्रैक्टर कैसे काम करता है। लेकिन अब GPS-based ट्रैक्टर ने खेती को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है। अगर आपने कभी सोचा है कि ये GPS ट्रैक्टर आखिर करते क्या हैं और कैसे काम करते हैं, तो चलो आज दोस्ताना अंदाज में इसे समझते हैं।
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GPS यानी Global Positioning System ये वही टेक्नोलॉजी है जो आपके मोबाइल के Google Maps में रास्ता दिखाती है। फर्क बस इतना है कि ट्रैक्टर में ये टेक्नोलॉजी खेत में ट्रैक्टर की लोकेशन, स्पीड और दिशा को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल होती है। मतलब, अब ट्रैक्टर बिना बार-बार मोड़ गलत किए, सीधे लाइन में चलता है, जिससे खेत की जुताई, बुवाई और फसल कटाई एकदम परफेक्ट होती है।
GPS ट्रैक्टर का असली खेल कैसे चलता है ये सिस्टम?
GPS-based ट्रैक्टर में एक GPS रिसीवर, कंट्रोल यूनिट और कभी-कभी ऑटो-स्टेयरिंग सिस्टम लगा होता है। ये रिसीवर सैटेलाइट से सिग्नल पकड़कर ट्रैक्टर की सटीक लोकेशन पता करता है। फिर कंट्रोल यूनिट उस डेटा को प्रोसेस करके ड्राइवर को स्क्रीन पर दिखाती है या ऑटो-स्टेयरिंग को कंट्रोल देती है। इससे फायदा ये होता है कि
- खेत में एक ही जगह बार-बार जुताई नहीं होती (ओवरलैप कम होता है)
- समय और ईंधन दोनों की बचत होती है
- खाद और बीज का इस्तेमाल सही मात्रा में होता है
- खेत की हर इंच जमीन का सही इस्तेमाल होता है
पुराने जमाने की खेती बनाम GPS खेती?
पहले किसान अंदाज से खेत में ट्रैक्टर चलाते थे। नतीजा ये होता था कि कभी-कभी एक हिस्से में ज्यादा बीज गिर जाते, कहीं कम, और जुताई में लाइनें टेढ़ी-मेढ़ी हो जातीं। लेकिन GPS ट्रैक्टर में ये प्रॉब्लम खत्म हो जाती है। अब ट्रैक्टर 2-3 सेंटीमीटर की सटीकता के साथ काम करता है, जिससे खेती एकदम पेशेवर तरीके से होती है।
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Swaraj 735 FE Price और GPS टेक्नोलॉजी का मेल?
Swaraj 735 FE भारत के किसानों के बीच काफी पॉपुलर ट्रैक्टर है क्योंकि ये दमदार, भरोसेमंद और बजट-फ्रेंडली है। इसकी कीमत लगभग 6 लाख से 6.5 लाख रुपये के बीच होती है (राज्य और ऑफर के हिसाब से थोड़ी-बहुत बदल सकती है)। अब सोचो अगर इस ट्रैक्टर में GPS सिस्टम जोड़ दिया जाए, तो ये और भी स्मार्ट हो जाएगा।
कई किसान अब अपने Swaraj 735 FE या इसी रेंज के ट्रैक्टर में GPS फिट करवाते हैं, जिससे खेत में समय की बचत होती है और ईंधन का खर्च कम होता है। ये अपग्रेड एक बार का खर्च है, लेकिन लंबे समय में ये मुनाफा बढ़ा देता है।
GPS ट्रैक्टर के फायदे किसान की जेब और समय दोनों बचाए?
GPS ट्रैक्टर के आने से खेती में कई बदलाव आए हैं:
- ईंधन की बचत : ओवरलैप और गलत दिशा में ड्राइविंग कम होने से डीजल की बचत होती है।
- समय की बचत : सीधी और सही लाइन में चलने से काम जल्दी खत्म होता है।
- उपज में बढ़ोतरी:सही मात्रा में बीज और खाद डालने से फसल अच्छी होती है।
- कम मेहनत: ड्राइवर को बार-बार स्टीयरिंग एडजस्ट नहीं करनी पड़ती।
- पेशेवर खेती: खेत देखने में भी एकदम बराबर और साफ-सुथरे लगते हैं।
GPS ट्रैक्टर के 5 रोचक फैक्ट्स?
- GPS ट्रैक्टर 24 घंटे में किसी भी मौसम में काम कर सकते हैं, धुंध या अंधेरे में भी।
- ये 2-3 सेंटीमीटर तक की सटीकता से खेत में लाइन बनाते हैं।
- दुनिया के कई बड़े फार्म में पूरी खेती GPS और ड्रोन से होती है।
- भारत में GPS सिस्टम लगवाने का खर्च 40,000 से 1.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
- GPS ट्रैक्टर से ईंधन की 15-20% तक बचत संभव है।

क्या GPS ट्रैक्टर हर किसान के लिए सही है?
देखो भाई, अगर तुम्हारे पास छोटा खेत है, तो हो सकता है GPS ट्रैक्टर का खर्च बड़ा लगे। लेकिन अगर तुम्हारे पास 10-15 एकड़ या उससे ज्यादा जमीन है, तो ये निवेश वसूल हो जाता है। साथ ही, अगर तुम कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग, बड़े पैमाने पर गेहूं, मक्का, धान जैसी फसलों की खेती करते हो, तो GPS ट्रैक्टर तुम्हारे लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।
FAQs : GPS based ट्रैक्टर से जुड़े सवाल क्या है?
1. GPS ट्रैक्टर की कीमत कितनी होती है?
GPS ट्रैक्टर की कीमत ट्रैक्टर के मॉडल और GPS सिस्टम के ब्रांड पर निर्भर करती है। एक सामान्य GPS सिस्टम 40,000 रुपये से शुरू होकर 1.5 लाख रुपये तक जा सकता है।
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2. क्या मैं अपने पुराने ट्रैक्टर में GPS सिस्टम लगा सकता हूं?
हां, लगभग हर ट्रैक्टर में GPS सिस्टम फिट किया जा सकता है, चाहे वो Swaraj 735 FE हो या कोई और मॉडल।
3. GPS ट्रैक्टर से ईंधन की कितनी बचत होती है?
आमतौर पर 15-20% डीजल की बचत हो सकती है, क्योंकि ओवरलैप और गलत ड्राइविंग कम हो जाती है।
4. क्या GPS ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के चल सकता है?
पूरी तरह बिना ड्राइवर के नहीं, लेकिन ऑटो-स्टेयरिंग मोड में ड्राइवर को सिर्फ मॉनिटर करना होता है।
5. क्या GPS सिस्टम बारिश या धुंध में भी काम करता है?
हां, GPS सैटेलाइट से सिग्नल लेता है, इसलिए बारिश, धुंध या रात में भी काम करता है।
निष्कर्ष: GPS-based ट्रैक्टर कैसे काम करता है?
GPS-based ट्रैक्टर खेती की दुनिया में एक बड़ी तकनीकी क्रांति है। यह सिस्टम खेत की सटीक लोकेशन, सीधी लाइन में जुताई, और कम से कम समय में अधिक काम करने की सुविधा देता है। इसके चलते डीज़ल, बीज और खाद की बचत होती है, साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। किसान को बार-बार खेत मापने या अनुमान लगाने की जरूरत नहीं रहती।
क्योंकि GPS तकनीक हर इंच का सही हिसाब रखती है।कुल मिलाकर, GPS-based ट्रैक्टर न सिर्फ मेहनत और समय बचाते हैं, बल्कि खेती को ज्यादा आधुनिक और मुनाफ़ेदार बनाने में भी मदद करते हैं।
